बुधवार, 19 अगस्त 2020

Hartalika Teej 2020 Date

Hartalika Teej 2020 Date
शिव-पार्वती 
Hartalika Teej 2020 Date:-भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej 2020 Date) कीया जाता है। इस साल यानी 2020 में यह व्रत 21 अगस्त  को पड़ेगा। हरतालिका तीज व्रत सोहागनो के लिए विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति के लंबी उम्र की प्राप्ति के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की उपासना करती है। 
हरतालिका तीज व्रत कथा:-
हरतालिका दो शब्दों से मिलकर बनता है- हरत और आलिका। हरत का मतलब होता है 'अपहरण' और आलिका का मतलब होता है 'सहेली'। कहा जाता है कि एक बार मां पार्वती की सहेली, पार्वती को जंगल में ले जाकर छिपा देती हैं। क्योंकि माता पार्वती के पिता हिमवान, माता पार्वती की शादी भगवान विष्णु से कराना चाहते थे। परंतु ए रिश्ता माता पार्वती को पसंद नहीं था। इसलिए वह बहुत परेशान रहती थी, यह देख उनके सखी ने पूछा क्या होआ पार्वती?तुम क्यों इतनी उदास हो?तब माता पार्वती ने अपनी सखी से कहा कि वह भोलेनाथ को अपने पति के रूप में स्वीकार कर लि है।अब वह ओर किसी को अपना पति  नहीं मानेंगी। 
    तब उनकी सखी ने माता पार्वती को घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की अराधना करने के लिए छोड़ आई।भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती जी ने शिव का शिवलिंग बनकर उनकी विधिवत पूजन की।माता पार्वती के कठोर तप को देख भगवान शिव प्रसन्न होकर माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था और भगवान शिव बोले भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को जो स्त्री हमदोनों की पूजन विधिवत करेंगी उनके मनपसंद जीवनसाथी मिलेगा और उनकी मनोकामना पूर्ण होगी।
 सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती है। इस व्रत को रखने से शिव पार्वती अखंड सौभाग्य का वरदान देते हैं। और वहीं दूसरी तरफ कुंवारी कन्या अपने मनचाहे वर को पाने के लिए एह व्रत करती है। 
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मंगलवार, 21 जुलाई 2020

LOVE STORY 2020 IN HINDI

LOVE STORY 2020 IN HINDI
LOVE-STORY 
LOVE STORY 2020 IN HINDI:-महीना कुछ यूं ही जनवरी-फरवरी की रही होगी। असमान नीला था हल्की-हल्की धूप निकल चुकी थी। हम अपने दोस्तों के साथ दफ्तर के परिसर में ही बैठकर धूप का लुत्फ उठा रहे थे।आज हम दोस्तों यहां वहां की बातें फेंक रहे थे तभी मेरी ध्यान दफ्तर के मेन गेट के पास जाकर टिकी ।
        काले रंग की जैकेट,गले में स्काप और लाल रंग की ड्रेस, अपने रेशमी बालों को मोड़कर आगे की तरफ कर के कोई आ रही थी।उसके चेहरे पर पड़ती हल्की सी धूप और उसके हवा में उड़ते जूल्फे मूझ पर जैसे केहेर ढा रही थी। जब वह  मेरी नजदीक आई तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गई।
लड़की अपनी सीट पर जाकर बैठ गई। टाइपराइटर को ठीक किया और टाइप करने में मशगूल हो गई। मैं भी उसके बगल वाली सीट पर जाकर बैठ गया पर मेरा मन काम करने में नहीं लग रहा था। मैं किसी भी हालत में लड़की से बात करना चाहता था। पर वह मेरे तरफ देख भी नहीं रही थी। मैं बैठ कर उसको देख रहा था लड़की की उंगली टाइपराइटर की कीबोर्ड पर ऐसे पढ़ रही थी जैसे हारमोनियम बजा रही हो। मैं बैठे-बैठे सपनों में खो गया जाने कौन सी दुनिया में चला गया। किधर से बोस आ गय और मुझे बोल रहे हैं, राहुल क्या कर रहे हो राहुल क्या कर रहे हो और मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। मैं उठकर हा सर ना सर करने लगा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोल रहा हूं।बोस वहां से चले गए, लड़की जोरों से हंसने लगी.. मैं उसकी तरफ देखता रह गया। लड़की फिर टाइप करने में बिजी हो गई। परंतु मुझ को टाइप करने में मन नहीं लग रहा था मुझे बेचैनी हो रही थी।मेने लड़की से बोला, hii मेरा नाम राहूल है और आपका? लड़की मुस्कुरा कर वहां से चली गई। 

शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

The best jokes in hindi

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Smile
स्वस्थ रहने के लिए मनुष्य बहुत सारे उपाय करते हैं।कोई स्वस्थ रहने के लिए दवाई  तो कोई योगा करता है। सबसे असान तरीका है आप हंसते रहिए। हंसते रहने से बहुत सारे रोग दूर होते हैं। इसलिए आपके लिए कुछ जोक्स लाये हैं। जीसको सुनकर आप माटी में लौट पौट होकर हसेगें। आपका दिन भर का थकान और मानसिक तनाव दूर होगा  ।।       
                 संताअपने क्लास रूम में 
मास्टर जी: कौन बच्चा, इस मुहावरे का उत्तर देगा?
                 पैर पर कुल्हाड़ी मारना..
संता बोला: सर मैं, पत्नी को मायके जाने से रोकना
मास्टर जी:confused,बच्चे को क्लास से निकाले या रहने दे।
The best jokes in hindi
Jokes 

शनिवार, 27 जून 2020

Raksha Bandhan 2020- रक्षा बंधन 2020

Raksha Bandhan 2020, रक्षाबंधन पर निबंध
Rakshabandhan 
रक्षा बंधन 2020,कब है रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त:-रक्षाबंधन पूरे भारतवर्ष में मनाई जाती है। यह एक ऐसा उत्सव जो सारे धर्मों के लोग मनाते हैं। इस दिन कलाई में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा चली आ रही है।यह उत्सव भाई बहनों का है।इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई उसके रक्षा करने का वचन देते हैं। यह उत्सव सावन महीने में मनाई जाती है।इस साल यानी 2020 में रक्षा बंधन 3 अगस्त(August) को मनाई जाएगी। रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त 9:30 से शुरू होकर 21:14 तक रहेगा। रक्षाबंधन पर बहुत सारी कथाएं हैं,चलिए जानते हैं रक्षाबंधन कहां से शुरू हुआ यानी रक्षाबंधन की कहानी:-

1. कृष्णा और द्रोपदी
कहा जाता है कि एक दिन एक सभा मे श्रीकृष्ण का उंगली कट कर थोड़ा खून बह गया था। तब द्रोपदी ने अपने सारी के आंचल से फाड़ कर उनका उंगली बांधा था। ऐसा माना जाता है कि उस दिन सावन पूर्णिमा था। उसी वक्त कृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि समय आने पर एक एक धागे का मोल चुकाएंगे। बहुत समय बीत जाने के बाद एक दिन द्रोपदी के पति(पांचो पांडव) चौसर के खेल में पांडवों ने कौरवों से अपने धन संपत्ति के साथ अपनी पत्नी को भी हार गए। तब भरी सभा में कौरवों ने द्रोपदी चिर हरण करने लगा। श्री कृष्ण ने अपने वादे के अनुसार अपनी बहन की लाज बचाई, रक्षाबंधन के धर्म निभाई।
2. हुमायूं ने रखी करनावती केे राखी का लाज-
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Raja humayun 

मंगलवार, 23 जून 2020

GANESH CHATURTHI 2020- गणेश चतुर्थी 2020


GANESH CHATURTHI 2020- गणेश चतुर्थी 2020,Sankashti chaturthi
Sri Ganesh
GANESH CHATURTHI 2020:-गणेश चतुर्थी हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार होता है। जो भाद्रपद के शुक्ल चतुर्थी के पूरे भारतवर्ष में मनाई जाती है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में इसकी तैयारी कुछ दिन पहले से ही शुरू हो जाती है और बड़ी धूमधाम से मनाई जाती हैं। मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र के घरों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित किया जाता है और गाजे बाजे के साथ 9 दिनों तक पूजा-पाठ करते हैं।10 वे दिन उनकी प्रतिमा को जल में विसर्जन कर दिया जाता है।
GANESH CHATURTHI 2020
*गणेश चतुर्थी आरम्भ 22 अगस्त 2020. शुभ मुहूर्त :-11:11 A. M. से 01:39 P. M. तक रहेगा*
*मूर्ति विसर्जन:- सितंबर 1, 2020 को 9:38 a.m. बजे*

  मुंबई के लालबाग के राजा बहुत प्रसिद्ध है। बॉलीवुड के सितारे यहां आकर भगवान गणपति बप्पा का दर्शन करते हैं।यहां की प्रतिमा सभी गणेश मूर्तियों में सबसे लंबी होती है।

शनिवार, 20 जून 2020

Solar Eclipse 21 June 2020

Solar Eclipse 21 June 2020, सूर्य ग्रहण,
Solar Eclipse 
Solar Eclipse: सूर्य ग्रहण तारीख और समय-- 
  • इस साल यानी 2020 रविवार, 21 जून को सूर्य ग्रहण सुबह 10:13 से शुरू होगा। दोपहर 12बजकर 02 मिनट पर ग्रहण  चरम सीमा पर होगा और इसका समाप्ती 3 बजकर 5 मिनट में होगा। 

सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं--
1. वलयाकार सूर्य ग्रहण-- वलयाकार सूर्य ग्रहण वह होता है जब चांद सूरज को इस प्रकार से ढक ले। सूर्य वलयाकार दिखाई दे यानी बीच से ढका हुआ और उसके किनारे से थोड़ी सी रश्मि बाहर निकलती हुई दिखाई देती है। 
2. पूर्ण सूर्य ग्रहण-- जब चंद्रमा सूर्य को पूरा तरह से ढक लेता है और पूरी अंधेरा छा जाती है तब उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण केहते  हैं। 
3. खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण-- जब चंद्रमा सूर्य को पूरा तरह से ढक ना पाए तब उसे खंड या आशिक सूर्यग्रहण कहते हैं। विश्व में बहुत जगह सूर्य ग्रहण दिखाई देती है। 
तो इस बार का सूर्य ग्रहण वलयाकार के रूप में दिखाई देगा। यह सूर्य ग्रहण पूरा भारत में दिखाई देगा। वैज्ञानिक के माने तो यह सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जिसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आता है। जिस कारण सूर्य का पूर्ण रश्मि पृथ्वी पर नहीं आती है और थोड़ा अंधेरा हो जाता है इसे सूर्यग्रहण कहते हैं। सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। सूतक काल इस बार 20 जून को रात 10:05 से शुरू हो जाएगी, जो ग्रहण की समाप्ति पर खत्म होगी। सूतक काल यानी इस दौरान किसी भी तरह की शुभ कार्य,धार्मिक आयोजन,पूजा पाठ नहीं कर सकते। यहां तक की मंदिर का फाटक बंद हो कर दिया जाता है जिसे सूर्यग्रहण के अशुभ प्रभाव भगवान तक पहुंच नहीं पाए।सूतक काल के समय राहु सूर्य और चंद्रमा पर हावी हो जाता है।माना जाता है कि ग्रहण के दौरान सबसे ज्यादा नकारात्मक उर्जा हावी रहती है। यह बहुत अशुभ होता है। 
सूर्य ग्रहण के समय क्या-क्या ना करें--- अब कीसी प्रकार की शुभकाम ना करें,गर्भवती महिला घर से ना निकले, खानपान बना नहीं सकते, खुली आंखों से सूर्य को ना दैखे इससे आपकी आखें खराब हो सकतीी हैं , सभी लोग घर मेंं ही रहे।
सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद क्या क्या करें-- आप अपने घर को अच्छी तरह से साफ करें। स्नान करें। देवी देवताओंं के मंदिरों को साफ करें और उसमें गंगाजल  छीटेे।
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Morning pic
राशियों पर भी पड़ेगा सूर्य ग्रहण का प्रभाव
मेष- राशि से तीसरे स्थान पर ग्रहण होगा अतः सामान्य फल देने वाला रहेगा। मेहनत के अनुसार सफलता मिलेगी। 
वृषभ- राशि से दूसरे स्थान पर ग्रहण हो रहा है। आपको सतर्क रहना होगा और वानी पर कंट्रोल रखे। 
मिथुन- इस राशि में ही ग्रहण का दुष्प्रभाव पड़ेगा। आपको धैर्य और संयम बनाए रखना होगा और संभलकर काम करें। वरना हानि हो सकती है।
कर्क- द्वादश राशि में ग्रहण होगा। आपको स्वयं पर काबू रखे। खर्च की अधिकता होगी। 
सिंह- एकादश स्थान पर ग्रहण होगा। अभी किसी को उधार न दे। आय में बढ़ोतरी के योग बन सकते हैं। 
कन्या- दशम स्थान पर ग्रहण होने से ब्यस्तता रहेगी। पिता की मदद से लाभ मिल सकता है।
तुला- नवम भाव में ग्रहण होने सेे इसके दूर प्रभाव भाग्य में रुकावट उत्पन्न करेगा। कार्य में देरी हो सकती है। संभल कर कार्य करें। 
वृश्चिक- अष्टम स्थान पर ग्रहण होने से सावधान रहने का समय है। वाहन, ऊंचाई और बिजली से सचेत रहना होगा नहीं तो हानी होगी। 
धनु- सप्तम भाव में ग्रहण होने वाला है। साथियों से तनाव हो सकता है। सोच-समझकर काम करें, अन्यथा हानि के योग हैं।
मकर- षष्ठम स्थान पर ग्रहण हो रहा है। रोजगार में नुकसान हो सकता है। शत्रुओं की वृद्धि होगी।
कुंभ- आपके लिए पंचम स्थान पर ग्रहण होगा। संतान से सुख और सहयोग मिलेगा। धन लाभ मिल सकता है।
मीन- चतुर्थ स्थान पर ग्रहण होने से चिंता में वृद्धि होगी। कार्य की अधिकता रहेगी। लापरवाही से बचना होगा।
नोट: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। rksstory.blogspot.com इस लेख में दी गई जानकारी की वैज्ञानिक प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

गुरुवार, 18 जून 2020

Happy father's day 2020,happy father's day status

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Father's day 
Happy father's day 2020 :-अपने पिता से तो सभी प्यार करते हैं, वह चाहे  गरीब हो या धनी, इसलिए साल में एक दिन पिताजी का स्पेशल डे होता है जिसको हम फादर्स डे कहते हैं। इस दिन बच्चे अपने पिताजी के लिए कुछ स्पेशल करते हैं।
 पिता का अपने बच्चों की जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसे अमूल्य योगदान के महत्व को पहचानने के लिए फादर्स डे मनाते हैं। भारत में हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है, इस बार 2020 में फादर्स डे 21 जून को मनाया जाएगा। पिता के साथ उनकी बातें सीखे दिलों दिमाग में हमेशा बसी रहती है जो जीवन की डगर पर सही ढंग से चलना सिखाता है और ऐसी राहे बनाता है जो हमें सफलता की ओर आगे बढ़ाता है। पिता की कहीं छोटी छोटी सी बातों में बरी बरी नसीहत छुपी रहती है।अपने माता-पिता से रिश्ते निभाना सीखते हैं बच्चे।पापा से पूछी गई हर अजीबो गरीबों सवालों का जवाब देते हैं, जैसे पर्वत इतनी ऊंची क्यों है? हवाई जहाज कैसे उड़ता है? समुद्र में पानी कहां से आता है? चिड़िया क्यों उड़ती है? और सारे सवालों पर मुस्कुराते और प्यार से जवाब देते हैं और बच्चों की सारी जिज्ञासाओं को शांत करते हैं। अगर पिताजी की कंपनी का नुकसान हो गया या सैलरी बंद हो गया हो तब भी पिताजी अपने परिवार में किसी  भी परेशानी को नहीं आने देते और अपने बच्चों की शिक्षा और खानपान में कभी कमी नहीं होने देते। मुश्किल घड़ी का सामना डट कर करना पापा ही सिखाते है, पापा सिर्फ धैर्यशिलता ही नहीं कभी न हारने का हौसला भी सिखाते हैं। 
कहते हैं कि पिता बाहर से कितने भी कठोर क्यों ना हो अपने दिल से कभी कठोर नहीं होते हैं। उनका मन हमेशा ही कोमल रहता है। खासकर बेटियों को लेकर वह अपने बेटियों की राजकुमारी के तरह रखते हैं
  अपने बेटियों को इस तरह के सिख देते हैं जिससे उसकी शादी के बाद स्वयं के साथ अपने पूरे परिवार को खुुश और एक जुट रखती है। पिता अपने बच्चों के लिए कितना कुछ करते हैं इसी करन उनके बच्चे शुक्रिया अदा करनेेेे के लिए फादर्स डे मनातेे हैंं।
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Father's day 2020 

शुक्रवार, 12 जून 2020

Rongali Bihu 2020,Bohag bihu

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Bihu-dance
Rongali Bihu 2020,Date:-भारतवर्ष में बहुत सारे राज्य है और इसीलिए यहाँ बिभिन्न प्रकार के पर्व मनाए जाते हैं।उनमें से एक राज्य असम भी है जहां बिहू मनाई जाती है। बांग्ला कैलेंडर के अनुसार कैलेंडर की शुरुआत के साथ ही इसका आरंभ हो जाता है शुरूआत के साथी वाले बिहू को बिषुब संक्रांति कहते हैं दूसरी बार वाले को पूष संक्राति तो तीसरे बार इसे कार्तिक महीने में मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अप्रैल महीने में मनाए जाने वाले बिहू को रोंगाली बिहू और बोहाग बिहू कहते हैं, वहीं अक्टूबर में मनाए जाने वाली बिहू को कंगाली और काती बिहू काहा जाता है और और जनवरी में मनाए जाने वाले बिहू भूगाली और माघ बिहू के नाम से जाना जाता है। तीनों बिहू में से रोंगाली बिहू सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस बार यानी 2020 में रंगाली बिहू या बोहाग बिहू 14 April को मनाया जाएगा।संक्षेप में रोंगाली बिहू के बारे में जानते हैं...
रंगाली बिहू 
       भारतवर्ष एक कृषि प्रधान देश है। जहां फसल कटाई की खुशी में लोग इसे मनाते हैं। असम के अलावा बहुत सारे जगहों पर मनाए जाते जैसे उड़ीसा, पंजाब नेपाल, तमिल नाडु एंड केरला में भी मनाई जाती है। बिहू के समय असम के प्राकृतिक दृश्य बहुत मनोरम होता है और चारों तरफ हरियाली छाई रहती है, मानो की प्रकृति भी झूम उठी है, खुशियां मना रही है।बिहू असमिया लोगों का एक उत्सव है, बिहू शब्द दिमासा लोगों की भाषा से लिया गया है जो कि प्राचीन काल से एक कृषि समुदाय से है। यह तो हर अप्रैल के महीने से शुरू होता है उस दिन घरों में विशेष पीठा, तील के लड्डू और नारियल के लड्डू बनाए जाते हैं। बिहू के पहले दिन गाय की पूजा होती है सुबह-सुबह नदी में ले जाकर उसे स्नान कराया जाता है नहलाने के लिए कच्चे हल्दी और कालई दाल के इस्तेमाल के करते हैं। उसके बाद वह मच्छर हटाने के लिए औषधि वाले पौधे को धूआ करते हैं।गाय को नए रस्सी से बांध ते हैं और गाय की पूजा करते हैं.।
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Bihu-assam

रविवार, 7 जून 2020

दशहरा 2020-विजयदशमी पर्व और मुहूर्त


दशहरा 2020-विजयदशमी पर्व और मुहूर्त
Dussehra in India 

दशहरा 2020-विजयदशमी पर्व और मुहूर्त:- इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि)। इस साल यानी 2020 में दशहरा 25 अक्टूबर को आरंभ होगा।दशमी शुभ मुहूर्त 25 अक्टूबर सुबह 7:41 और समाप्त 26 अक्टूबर सुबह 8:59 मिनट पर। ऐसा विश्वास है कि दशहरा के दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं रामलीला का आयोजन होता है रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है।। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा शक्ति पूजा के रूप में दोनों ही रूपों में यह शक्ति पूजा का पर्व है शस्त्र पूजन की तिथि है ॥हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है भारतीय संस्कृत वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है॥ व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है।। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।
दशहरा 2020-विजयदशमी पर्व और मुहूर्त

CHRISTMAS(ESSAY)

Christmas is the season of joy, peace, and happiness. It is the special season set aside to celebrate the birth of Jesus Christ on 25th December. Though this was its original purpose, the celebration of Christmas has grown to become a symbolic time for living in peace and love.
Usually, the celebration begins much before the main day and continues for around 15 days after that. People celebrate Christmas to honor the birth of Jesus Christ. Religious people go to church and light the candles to pray to their God Jesus Christ.
A festival that is equally loved and cherished by adults and kids. People also bring a Christmas tree to their homes and decorate it with colorful balls, star, ribbons, and red socks. Market shops and showrooms display a theme of glittering red and white colors to set up the Christmas mood.
On Christmas night, folks enjoy a big feast and share gifts with each other. Homemade traditional plum cakes, cupcakes, and muffins are the special treats on Christmas. Kids are showered with lots of presents and new dresses. They also get to meet the ‘Santa Claus’, dressed in a white costume and fullfly red, who greets them with hugs and gifts.On this day, people remember Jesus Christ and his lessons of life. The festival definitely teaches us to practice kindness and love toward each other and help those who have less than us.
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CHRISTMAS(ESSAY)

Anniversary

          मौसा मौसी की जोड़ी कभी ना टूटे,
        खुदा करे आप एक दूजे से कभी न रूठे
यूंही ही                      यूंही एक होकर ऐ🤗😘 💞  जिंदगी कटे
     आप दोनों से खुशियों के एक पल भी न छूटे।
      मुबारक हो आपको शादी का सालगिरहा    
          Happy Anniversary 🌹😘
Anniversary, Marriage day
Sweet hurt

Diwali 2020- दीपावली 2020 कब है

Diwali 2020- दीपावली 2020 कब है
Diwali-2020
Diwali 2020-दीपावली 2020 की तारीख और मुहूर्त :- दीपावली मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं की मान्यताएं हैं।सभी देशों मे और देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे मनाने के तरीकों में भी विभिन्नता पाई जाती हैं।दिपावली, बूराई पर आच्छाई की जीत को दर्शाता हैं। चाहे बूराई कितनि भी बरी क्यो न हो पर उसपे आच्छाई की जीत होती है।दीपावली से हमें यही सिख और संदेश मिलती हैं कि हमेशा अच्छाई और सच्चाई के रस्ते पर चलो चाहे रास्ते कितनी मूशकिल क्यो न हो जीत तूम्हारी होगी। इस साले यानी2020 में दीपावली शनिवार 14 नवंबर। दीपावली लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त 17:30 मिनट से 19:26 मिनट तक। दिवाली क्यों मनाई जाती है, चलीय अब कहानी के माध्यम से जानते हैं... 
(1) राम अयोध्या लौटे थे
माना जाता है कि भगवान राम को जब वनवास जाने को कहा गया था सभी नागरिक बड़ी दुखी हुए थे और जब भगवान राम वनवास गए थे तभी उनकी पत्नी सीता को रावण ने अपहरण कर लिया था।तब उन्होंने रावण को हराकर और सीता को बचाकर,आपनी चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे तो, नगरवासियों ने पूरे अयोध्या को रोशनी से सजा दिया और यहां से ही भारतवर्ष में दिवाली के त्योहार का आरंम्भ हो जाता है।
Diwali 2020- दीपावली 2020 कब है
Ram&Sita
2- हिरण्यकश्यप का वध
एक पौराणिक कथा के अनुसार विष्णु ने अपने भक्त पहलाद को बचाने के लिए नरसिंह रूप का धारणकर हिरण्यकश्यप का वध किया था और हिरण्यकश्यप जैसे दैत्यराज की मृत्यु पर प्रजा ने घी के दीये जलाकर दिवाली मनाई थी।
Diwali 2020- दीपावली 2020 कब है
Lord Narsingha

गुरुवार, 4 जून 2020

चंद्र ग्रहण 5 june 2020

चंद्र ग्रहण शुरू होगा। ज्योतिष गणना के अनुसार यह चंद्र ग्रहण 05 जून रात 11:15 बजे से शुरू होगा, 06 जून 02:34 बजे तक दिखेगा। अबकी बार का चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि और ज्येष्ठ नक्षत्र में लगेगा, यानी राशियों पर भी पड़ सकता है इसका प्रभाव।इसी कारण ज्योतिषियों की नजर रहेगी।
चंद्र ग्रहण, lunar eclipse
Lunar eclipse 

देशभर में कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण _
अबकी बार का यह चंद्र ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया,  अफ्रीका और यूरोप में दिखाई देगा। यह कूछ पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण होगा जिसमें आमतौर पर एक पूर्ण चंद्रम से अंतर करना थूरा मुश्किल हो सकता है। यह चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 18 मिनट होगी।5 जून को रात 11:15 बजे से चंद्र ग्रहण शुरू होगा और रात 12:54 बजे सबसे ज्यादा इसका असर दिखाई देगा। 06 जून 02:34 बजे समाप्त हो जाएगा.

चंद्रग्रहण के दौरान सेहत से जुड़ी सावधानियां. 🌃Health Related Precautions During Lunar Eclipse🙏

ग्रहण के दौरान कुछ लोग उपवास में विश्वास करते हैं, जबकि कुछ लोग किसी भी तरह के घरेलू काम से बचने की सलाह देते है। तो आइये जानते हैं सेहत से जुड़ी कौन-कौन सी सावधानियां आपको करनी चाहिए ग्रहण के दौरान कोई बड़ी सावधानी नहीं है, लेकिन आयुर्वेद की दृष्टिकोण से ग्रहण से दो घंटे पहले आसानी से पचने वाला हालका भोजन खाने की सलाह देती है।ग्रहण के दौरान कुछ भी न पीएं और ना ही खाए। जो भी भोजन आप ग्रहण से पहले खाते हैं उसमें आप हल्दी भी डाल दे(optional) है।और भी सलाह दी जाती है कि ग्रहण से दो घंटे पहले खूब पानी पी सकते हैं या तुलसी की चाय भी पी सकते हैं। वैज्ञानिक रूप से, इन सावधानियों का कोई पता नहीं चला है। 

क्या खुली आंखों से ग्रहण देख सकते हैं?? 

चंद्र ग्रहण के दौरान चांद को खुली आंखों यानी सीधे आंखों से देखने से किसी प्रकार की आपकी आंखों को नुकसान नहीं पहुंचाता, एक्सपर्ट्स कहते हैं। जबकि, सूर्य ग्रहण को खोली आंखों से देखने पर आपकी आंखों को नुकसान पहुंचाता है, इसे सौर रेटिनोपैथी कहा जाता है। कभी भी नंगी आंखों से ग्रहण न देखें इससे आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। सूर्यग्रहण को खास सोलर फिल्टर वाले चश्मों से देखें। इन्हें सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या आइक्लिप्स ग्लासेस भी कहा जाता। आपके सिमपल चश्मे या गॉगल्स आंखों को यूवी रेज़ से सुरक्षित नहीं रख सकते। 

नोट: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। rksstory.blogspot.com इस लेख में दी गई जानकारी की वैज्ञानिक प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

                             



रविवार, 31 मई 2020

RATHYATRA-PURI-2020- रथ-यात्रा

RATHYATRA-PURI-2020- रथ-यात्रा
Jagannath-Puri
  RATHYATRA-PURI-2020-रथ यात्रा का पर्व भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है और देश भर में इसे काफी श्रद्धा तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।इस साल यानी 2020 का रथयात्रा 23 जून को है। इसका सबसे भव्य आयोजन उड़ीसा राज्य के जगन्नाथपुरी में देखने को मिलता है।Covid-19(Corona virus) की वजह से Supreme Court ने कई सारी सर्तो के साथ रथ यात्रा करने का परमिशन दििया है।
रथ यात्रा क्यों मनाई जाती है
 पौराणिक और ऐतहासिक मान्यताएं तथा कथाएं प्रचलित है। एक कहानी के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न अपने परिवार सहित नीलांचल सागर (वर्तमान रथ यात्रा क्यों मनाई जाती है में उड़ीसा क्षेत्र) के पास रहते थे।

     एक बार राजा समुद्र के पास टहल रहे थे समुद्र में उन्हें एक बहुत बड़ा लकड़ी तैरती हुई दिखाई देती है। राजा ने उस लकड़ी को देखा तो तुरंत ही समुद्र से निकालने का आदेश दिया।राजा के आदेश पर लकड़ी को निकाल दिया गया और उस लकड़ी की सुंदरता को राजा देखते ही रह गए। उनका मन किया कि इस लकड़ी से जगदीश जी की मूर्ति बनायी जाय। वह इसपर सोच विचार ही कर रहे थे कि तभी वहां एक बूढ़े बढ़ई के रुप में देवों के शिल्पी विश्वकर्मा प्रकट हो गये और बोले, हे राजन मैं जगदीश जी का मूर्ति बनाऊंगा पर मेरा एक शर्त है। अगर आप मान ले तो मैं राजी हूं, राजा बोले ठीक है परंतु वह शर्त आपका क्या है? बूढ़े बढ़ई के वेश में प्रकट हुए भगवान विश्वकर्मा जी ने वह शर्त कहा मैं जबतक कमरे में मूर्ति बनाऊंगा तबतक मैं कमरे का दरवाजा बंद रखूंगा और मेरी इजाजत के बिना दरवाजा कोई खोले नहीं और मेरे पास कोई आ ना सके। राजा ने उनकी इस शर्त को मान लिया।वह बूढ़ा बढ़ई मूर्ति निर्माण कार्य में वही लगे जहां आज श्री जगन्नाथ जी का मंदिर है।
   बहुत दिन बीत गया अभी तक दरवाजा नहीं खोला था। राजा को चिंता होने लगी, उनको तो मालूम नही था कि वह बुड्ढा बढ़ई ही स्वंय विश्वकर्मा है। कई दिन बीत जाने के पश्चात महारानी को ऐसा लगा कि कही वह बूढ़ा बढ़ई अपने कमरे में कई दिनों तक भूखे रहने के कारण मर तो नही गया। अपनी इस शंका को महारानी ने राजा से भी बताया। राजा को भी अब ऐसे ही लगने लगा था कि वह बुड्ढा बढ़ई  बहुत दिन भूखे रहने के कारण मर गया होगा तब राजा ने दरवाजा खोलने के लिए निश्चित किया और जब राजा ने कमरे का दरवाजा खुलवाया तो वह बूढ़ा बढ़ी आलोपित हो गए और कमरे में नहीं मिले, लेकिन उनके द्वारा लकड़ी की अर्द्धनिर्मित श्री जगन्नाथ, सुभद्रा तथा बलराम की मूर्तिया वहां मौजूद मिली। यह देख राजा रानी बहुत दुखी हो गए उन्हें लगा कि उनकी गलती की वजह से यह मूर्ति पूरी नहीं बन सकी ,लेकिन उसी समय वहां आकाशवाणी हुई कि हे राजन ‘व्यर्थ दु:खी मत हो, हम इसी रूप में रहना चाहते हैं मूर्तियों को पवित्र कर स्थापित करवा दो।' राजा ने उनके आदेश पर अर्ध निर्मित मूर्ति को मंदिर में स्थापित करवा दिया और पूजा पाठ आरंभ की। आज भी वही अर्धनिर्मित मूर्तियां जगन्नाथपुरी मंदिर में विराजमान हैं। जिनकी सभी भक्त इतनी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं और यही मूर्तियां रथ यात्रा में भी शामिल होती हैं।जगन्नाथ रथ यात्रा आरंभ होने की शुरुआत में पुराने राजाओं के वशंज पारंपरिक ढंग से सोने के हत्थे वाले झाड़ू से भगवान जगन्नाथ के रथ के सामने झाड़ु लगाते हैं और इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ रथयात्रा शुरु होती है। 

      रथ यात्रा के शुरु होने के साथ ही कई सारे पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाये जाते हैं, इसकी ध्वनि के बीच सैकड़ो लोग मोटे-मोटे रस्सों से रथ को खींचते है। इसमें सबसे आगे बलभद्र (बलराम) जी का रथ होता है और इसके थोड़ी देर बाद सुभद्रा जी का रथ चलना शुरु होता है॥सबसे अंत में लोग जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक खींचते है॥रथ यात्रा को लेकर मान्यता है कि इस दिन रथ को खींचने में सहयोग से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।इसी कारण इस दिन भक्त भगवान बलभद्र, सुभद्रा जी और भगवान जगन्नाथ जी का रथ खींचने के लिए ललायित रहते हैं।। जगन्नाथ जी की यह रथ यात्रा गुंदेचा मंदिर पहुंचकर पूरी होती है।
        इस स्थान को भगवान की मौसी का घर माना जाता है। यदि सूर्यास्त तक कोई रथ गुंदेचा मंदिर नहीं पहुंच पाता है तो वह अगले दिन यात्रा पूरी करता है। इस जगह पर भगवान एक सप्ताह तक प्रवास करते हैं और यहीं उनकी पूजा-अर्चना भी की जाती है। आषाढ़ शुक्ल दशमी को भगवान जगन्नाथ जी की वापसी रथ यात्रा शुरु होती है। इस रथ यात्रा को बहुड़ा यात्रा कहते हैं।
      शाम से पूर्व ही तानो रथ जगन्नाथ मंदिर तक पहुंच जाते हैं। जहां एक दिन तक प्रतिमाएं भक्तों के दर्शन के लिए रथ में ही रखी जाती है। अगले दिन मंत्रोच्चारण के साथ देव प्रतिमाओं को पुनः मंदिर में स्थापित कर दिया जाता है और इसी के साथ रथ यात्रा का यह पूर्ण कार्यक्रम समाप्त हो जाता है। इस पर्व के दौरान देश भर के कई शहरों में भी मानाया जाता है।
RATHYATRA-PURI-2020- रथ-यात्रा
जगन्नाथ जी 
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सोमवार, 25 मई 2020

KRISHNA -JANMASHTAMI-2020

KRISHNA -JANMASHTAMI-2020
JANMASHTAMI
 KRISHNA -JANMASHTAMI-2020:-हम लोग जन्माष्टमी बड़े धूमधाम से मनाते हैं। लोग अपने घर में पूजा पाठ एवं उपासना करते हैं,और कृष्ण के जन्मोत्सव के ऊपर कहानियां सुनते हैं। वातावरण श्री कृष्ण के रंग में डूब जाता है। इस साल यानी 2020 में कृष्ण जन्माष्टमी 11 अगस्त मंगलवार को है। Covid 19(Corona virus) की वजह से बहुत सारे मुश्किलें आ रहे हैं। इसलिए  स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए जन्माष्टमी मनाएंगे।
 पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी को पापियों से मुक्त करने हेतु कृष्ण के रूप में अवतार लिया था। क्या आप लोग जानते हैं जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है? क्योंकि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्री कृष्ण का जन्म हुआ था,  इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं।इसी तिथि में की घनघोर अंधेरी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवी की गर्भ से भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था।यह तिथि उसी शुभ मुहूर्त को याद दिलाता है।
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https://rksstory.blogspot.com/2020/06/raksha-bandhan.html( रक्षाबंधन क्यों और कैसे मनाई जाती है)
KRISHNA -JANMASHTAMI-2020
जन्माष्टमी  के आगमन से पहले ही उसकी तैयारी जोर-शोर से आरम्भ हो जाती है, पूरे भारतवर्ष में इस त्यौहार का उत्साह देखने योग्य होता है। जन्माष्टमी के विभिन्न रंगों के त्यौहार विभिन्न रूपों में मनाया जाता है।कही रंगो की होली होती है तो कहीं फूलों का और इत्र की सुगंध का उत्सव होता है तो कहीं दही हांडी फोड़ने का जोश और कहीं इस मौके पर भगवान कृष्ण के जीवन के मोहक छवि को देखने को मिलती है। मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है भक्त इस अवसर पे मंदिरों में झांकियां सजाते है। भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है तथा कृष्ण रासलीला का आयोजन किया जाता है।
KRISHNA -Janmashtami-2020, दही हांडी
 दही हांडी
जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म संबंधित कथा सुनाती हूं जो इस प्रकार हैं--
        द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करते थे। उनका जेष्ठ पुत्र कंस बरा ही जालिम क्रूर आदमी था परंतु अपने बहन से बहुत प्यार करता था। अपनी बहन देवकी के विवाह यदुवंशी के सरदार बासुदेव नामक युद्धा से किया था।। कंस अपनी बहन देवकी की विदाई कर रहा था तभी आकाशवाणी होती है, ऐ कंस तेरी बहन देवकी की आठवीं पुत्र तेरी काल बनेगी। तभी कंस भयभीत हो जाता है और वासुदेव को मारना चाहता है। देवकी अपने पति के प्राण की भीक्षा अपने भाई से मांगती है और उसे बोलती है कि मैं अपने सारे संतान तुम्हें दे दूंगी। कंस अपनी बहन के बात मान लेता है और उन्हें कारावास में बंद कर देता है।
         उसे मालूम था कि अगर उसके पिता को मालूम चल जाए तो उसे दंडित करंगे इसीलिए उसने अपने पिता को सिंहासन से उतारकर खुद  सिंहासन पर बैठ गया। कुछ समय के बाद देवकी गर्भवती होती है और नौ महीने के बाद एक बच्चे को जन्म दिया। जब कंस को मालूम हुआ तो वह देवकी के पास आया और बोला तुम अपने संतान को मुझे दे दो  फिर देवकी ने अपने वादे के अनुसार वह अपनी संतान को कंस को सौंप देती है। कंस वह नवजात शिशु को जमीन पर पटक निर्दयता से हत्या कर दिया। ऐसे ही अपनी बहन देवकी की 6 व संतान को मार देता है। जब देवकी के सातवें संतान गर्भ में थे तब योग माया ने आकर्षित करके रोहिणी, जो बासुदेव की पहली पत्नी थी उन्ही के गर्भ में उसे डाल दिया था। उनकी सातवें संतान का नाम बलराम था।रानी देवकी ने फिर से गर्भवती होती है और आठवीं संतान को जन्म देगी जो कंस का काल बनेगा।जब देवकी आठवें पुत्र को जन्म देती है तब विष्णु भगवान कारावास में प्रकट होते हैं और बासुदेव से कहते हैं कि मेरा ही एक रूप है जो तुम्हारे बच्चे के रूप मे आया है। इस बालक को ले जाकर अपने दोस्त नंद के यहां छोर आव जिस से तूम्हारा बालक सुरक्षित रहेगा और वहां से उनकी पुत्री माया को लेकर यहां पर आ जाव।
         विष्णु भगवान का आदेश मान वह अपने बालक को गोद में उठाते हैं तभी उनके पैर की जंजीरे खुल जाती हैं कारावास के दरवाजे खुलते हैं और उस सारे सैनिको बेहोश हो जाते हैं तभी वह अपने बालक को लेकर वह राजमहल से निकलकर यमुना के तट पर पहुंचते हैं यमुना पूरी भर्ती रहती है और बादल गरज रहे होते हैं और बारिश हो रही होती है वह अपने बालक को लेकर यमुना के नदी में जैसे ही पैर रखते हैं उसमें से यमुना देवी निकलकर उस बालक को को प्रणाम करती है और उन्हें जाने के लिए वह मार्ग दे देती है। वह अपने दोस्त नंद के यहां जाते हैं वहां नंद और उनकी पत्नी सोई रहती है, वह अपने बच्चे को वहां छोर उनकी पुत्री माया को ले आते हैं। जब बासुदेव माया को लेकर कारावास में प्रवेश कर जाते हैं तभी सब सैनिकों का मूर्छित अवस्था दूर हो जाता है और वह जाकर कंस से कहते हैं कि देवकी की आठवीं संतान हो चुकी हैं कंस अपने बहन के पास आता है और उनसे वह संतान को लेकर जैसे ही जमीन पर पटकने वाला रहता है तभी वह माया आकाश में उड़ जाती है और बोलती है मूर्ख कंस तेरा काल जन्म ले चुका और वह बहुत सुरक्षित जगह पर बढ़ रहा है और जब भी तुम्हारा समय पूरा हो जाएगा तब वह तुम्हारा वध कर देगा। यह कह कन्या आलोपित्त हो जाती है। कंस बड़ा ही भयभीत हो जाता है और वह बच्चे को ढूंढने के लिए सारे जगह पर आपना गुप्त चर भेज देता है उसे मालूम चलता है कि गोकुल में बासुदेव के दोस्त नंद यहां बच्चा जन्म लिया है।उसे मारने के लिए वह बूहत सारे असुर को भेजता है और सारे असूर परास्त होकर आ जाते हैं।
          नंद और यशोदा के यहां नटखट कृष्ण बड़े होते हैं।कंस के अत्याचार देखे नंद और यशोदा अपने बच्चे को सुरक्षित करने के लिए वृंदावन चले गए। वृंदावन में वह अपने गोपियों के साथ रास रचाते हैं और बहुत सारे औसुरी ताकत से वृंदावन बन बासीयो को बच्चाते रहते।वृंदावन में कालिया और धनुक का सामना करने के कारण दोनों भाइयों के ख्याति के चलते कंस समझ गया था कि भविष्यवाणी अनुसार इतने बलशाली किशोर तो वासुदेव और देवकी के पुत्र ही हो सकते हैं। तब कंस ने दोनों भाइयों का पहलवानी के लिए निमंत्रण दिया, क्योंकि कंस चाहता था कि इन्हें पहलवानों के हाथ मरवा दिया जाए, लेकिन दोनों भाइयों ने पहलवानों को शिरोमणि चाणूर और मुष्टिक मारकर कंस को पकड़ लिया और सबके देखते ही देखते उसे भी मार दिया और अपने माता-पिता और नाना जी को कारावास में मुक्त कर दीये। मथुरा वासी को कंस के अत्याचारों से मुक्त मिल गई । इसीलिए श्री कृष्ण के जन्म के दिन सारे लोग जन्माष्टमी मनाते हैं।
KRISHNA -JANMASHTAMI-2020
KRISHNA 
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बुधवार, 20 मई 2020

झांकी इम्तिहान की

                     आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं, 
                        झांकी इम्तिहान की।। 
                      आशा है कि पास करेंगे फिर, 
                          मर्जी भगवान की।।

                   अग्रेजी की आई परिक्षा जीस दिन, 
                             होने वाली थी।।
                     दिल सबों का धरक रहा था, 
                         उठ सबोकी काली थी॥
                      पेपर लीखा था नाम लिखकर, 
                         पवन पूत्र हनुमान की।।
                     
                       आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं, 
                        झांकी इम्तिहान की।। 
                      आशा है कि पास करेंगे फिर, 
                          मर्जी भगवान की।।
      
                 भूगोल इतिहास की तो बात मत पूछो 
                      इसका एरिया लाम्बा है॥
                  रेखा गणित के ये तो समझो
                     घर का बिचला खम्भा है ॥

                        आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं
                             झांकी इम्तिहान की।। 
                          आशा है कि पास करेंगे फिर
                              मर्जी भगवान की।।
           
                      
झांकी इम्तिहान की, student picture
Student pic

                  

मंगलवार, 19 मई 2020

MOTIVATIONAL STORY IN HINDI

MOTIVATIONAL STORY IN HINDI
Success story 
 MOTIVATIONAL STORY IN HINDI:-हम सब सफल होना चाहते हैं। परंतु जीन्दगी में सब सफल नहीं हो पाते कूछ ही सफल हो पाते हैं ।लेकिन सफलता भी अपनी कीमत मांगती है।आइये काहानी के माध्यम से जानते हैं सफलता कैसे प्राप्त कर सकते हैं:-
एक गांव में चीन्टू अपने दादा जी के साथ रहता था। दादाजी उसे रोज एक काहानी सूनाते थे।एकदिन चीन्टू अपने दादा जी से पूछा कि सफलता कैसे प्राप्त कर सकते हैं। दादाजी बोोले तूम्हे  आज इसी पर काहानी सूनाता हूूँ। एक बच्चा था वह बड़ा ही आलसी थाा। वह पाढाई में तेज नही था और कोई काम भी करता तो सफल नहीं होता इसलिए वह बूहत दुखी रेहता।उसके माता-पिता बड़ी ही परेशान रहते। उस बच्चे को दूर एक गुरुकुल में पढ़ने के लिए भर्ती कर दिए। वहा उससे सभी बच्चे पढने में तेज थे और उसे सभी चििढ़ाते थे।उसेे बूहत खाराब लगता इसलिये वह रोज सूचता की अपने घर वह कैैसे चला जाय। एकदिन वह छीपते-छोपाते गुरुकुल से भाग गया। वह चलते चलते बूहत दुर आ गया। उसे पानी प्यास लग चुकी थी थोड़ा और आगे बढा तो उसे एक कुआं दिखाई परी।
MOTIVATIONAL STORY IN HINDI, success story
MOTIVATIONAL STORY 
वही पर बाल्टी रखा था पर पानी निकाल कर पी नहीं रहा था।उसे लगता था कि कोई आयगा ओर उसे पानी नििकाल कर देगा, बूहत देर हो गयाा उसे कोई पानी निकााल कर नही देता। लोग आते ओर पानी पी कर चले जाते। अब उसेे बुहत जोर से पानी प्यास लग चोका थाा।इसलिए वह खुद पानीी निकाले के लिए गया ओर बाल्टी उठाया और पानी निकाल कर पानी पिय लिया। बाल्टी रखते समय उसने देखा कुआं पर निशान परे होये है। तभी उसने सोचा कि अगर एक कोमल रस्सी रोज घिसने से शील पर निशान छोड़ सकती है।तब तो मै इंसान हूँ मै अपने आप को किसी काम के प्रति जुनून पैदा कर लोो तब मै भी जरुर सफल हो जावगा।वह बच्चाा यह सोच अपने घर नही गुरूकुल लोट जाता है। वह वहां जाकर बूहत मेहनत करता है। जीससे उसका काफी ख्यााति और यश मिल जाता है।
  How to be motivate yourself( खुद को मोटिवेट कैसे करें) 
   (1)focus on time(समय का ध्यान रखे)
    (2)be honest (ईमानदार रहे)
     (3)passion (जुनून)
      (4)never stop learning (सीखना कभी भी बंद ना करें)
      (5)Take action (कारवाई करें)

  MOTIVATIONAL STORY IN HINDI
स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा है:-"उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्ति ना हो जाये"।

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शनिवार, 16 मई 2020

Horror hospital

एक समय की बात है, एक गांव में एक हस्पताल था। वहां एक डॉक्टर रहा करती थी। वह मरीजों को देख भाल कीया करती थी। गांववासी उन्हें डाक्टर दीदी कहा करते थे।
  एक मरीज को दवा देकर अपनी घर लोटने मे काफी देर हो चुकी थी, रास्ते सूनसान हो चूके थे, कुछ दूर एक पैर के नीचे से कीसी महिला की रोने का स्वर सूनाई दी, डॉक्टर दीदी उस और बढीं। डॉक्टर दीदी उस औरत के पास गई और पूछने ही वाली थी की औरत चूडेल बन गई पलक झपकते ही डॉक्टर दीदी के अन्दर समा गई। उन्हें कूछ समझ नहीं आया। डॉक्टर दीदी घर लौट गई। रात के जैसे ही दो बजे वह चूड़ेल बन गईं और और खून की प्यासी हो गई ओर अपने घर की बील्ली को हत्या कर उसकी खून पी गई। जब सूबह होआ तो ठीक हो गई। हर रात दो बजे वह चूड़ेल हो जाती और सूबह में ठीक हो जाती। इसलिए वह अपने आप को रात में जंजीर से बादं लिया करती क्योंकि वह किसी को नोकसान नही करना चाहती।
   एकदिन हस्पताल में मरीज ज्यादा होने के कारण उन्हें हस्पताल में रुकना पड़ा वह डर रही थी रात में किसी को हानि ना पहूंचा दे। इसलिए रात में अपने आपको एक रूम में बदं कर ली। रात के दो जैसे ही बजे वह चूड़ेल बन गई और दरवाजा ठूकने लगी। मरीज डर डर कर दरवाजा खोल दिये। डॉक्टर दीदी के रूप को देख कर अचम्भा हो गये और भागने लगे। सारे मरीज भाग कर एक रूम में बंद हो गए परन्तु एक मरीज बाहर ही रह गया। चूड़ेल वहां आई और बोली मै बहुत दिनों से भूखी हूँ मुझे यह डाक्टर दीदी जंजीरों से बादं देती, खाने को नही मिलता परन्तु आज बूहत खुश हूँ। आज खाने को इंसान मिले हैं, चूड़ेल उस आदमी के पास जैसे ही जाती उसके गले में परे ताबीज देख डर जाती है और उस से थोड़ा दूर जा खड़ी होती हैं। आदमी को कुछ समझ नहीं आता है तब उस आदमी का नजर अपने ताबीज पर जा परता है। आदमी को समझ आ गया चूड़ेल उसके ताबीज से डर रही है। आदमी ने उस ताबीज को नीकाल कर अपने हाथ में ले लिया, चूड़ेल के ओर बढ़ने लगा चूड़ेल बोल रही मेरे नजदीक मत आ। पर आदमी ने हिम्मत कर अपनी ताबीज को चूड़ेल के गले में डाल दिया। डॉक्टर दीदी के अदंर से चूड़ेल निकल कर भाग गई। डॉक्टर दीदी अच्छी हो गईं, उस आदमी को धन्यवाद की।
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फादर्स डे पर कहानी:-

शुक्रवार, 15 मई 2020

Funny whatsapp status 😝😜

जीन्दगी हमारी
पैसा हामारा
पाढाई हमारी
फ्यूचर हामारा
शादी हामारी 
और टेंशन सारा
   आंटीयो को
   😜🤔😂🤣

MORAL STORY 2020 IN HINDI

  • MORAL STORY 2020 IN HINDI
    King-Place 
    MORAL STORY 2020 IN HINDI:-एक समय की बात है, एक नगर में राजा चार रानियों के साथ रहते थे। वह अपनी तिन रानियों को बुहत प्यार करते थे, और एक से नहीं ।एक दिन राजा बूहत बिमार पर गये और मरने के अवस्था में थे और सोचने लगे कि में तो तीन रानियाँ से बूहत प्यार करता हु।वह जरूर मेरे साथ जाने के लिए त्यार हो जायगी।यह सूच वह अपनी तिन रानियों के पास गये
MORAL STORY 2020 IN HINDI
Queens pic
पहली रानी जिससे वह बूहत प्यार करते थे उसे बोले क्या तूम मेरे साथ स्वर्ग चलना चाहती हो? रानी बोली मै आपके साथ नही जाउंगी। उन्हे बहुत दुख हुआ, वह दुसरी रानी के पास गये और पूछेे क्या तुम मेरे साथ मरने के लिए त्यार हो। रानी बोली मै खूबसूरत हो और जवा हूँ । आपके जाने के बाद  मै दुसरा शादी कर लूगीं। वह भी त्यार नहीं होई। अब वह अपनी तीसरी रानी के पास गये जो हर दुुुख-सुख में साथ निभाती थींं, उन्हें लगता था वह जरूर त्यार हो जायगी परन्तु वह भी इन्कार कर दिया। राजा बूहत दुखी होकर बैठ गए तभी उन्हें एक आवााज सोनाई दीी मै आपके साथ जाने के लिए त्यार हूूँ ।
MORAL STORY 2020 IN HINDI
King & Queen 
वह बूहत आश्चर्यजनक दृष्टि से उनके ओर देखे! वह कोई ओर नही उनकी चतुर्थी पत्नी ही थी। राजा बोले जीनसे प्यार कीया वह साथ छोड़ दिया और जीसे अवहेलना कर रहा था वही साथ देने के लिए त्यार खड़ी है।राजा को अपनी गलती काा एहसास हुआ, रानी से माफी मांगी और बोले तूमसे ही प्यार करना बेहतर होता। 

  • *"इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में चार पत्नी होती है। पहली आपना शरीर जीसे मनुष्य बूहत प्यार करता है पर मरने के बाद साथ छोड़ देताहै। दूसरी उसका पैसा जीसे कमाने के लिए  अपना सारा जीवन लगा देता है पर मरने के समय वह भी साथ छोड़ देती है। तीसरी उनके साखा-सम्बन्धी जो हर दुख - सुख में तो साथ देते हैं पर मरने पर साथ छोड़ देते हैं। सिर्फ एक ही चीज साथ नीभाती हे वह है उनका अच्छे कर्म उनकी चतुर्थी पत्नी। इसलिए कर्म करो वही साथ निभाती हैं।" I hope you like it MORAL STORY 2020 IN HINDI

गणेश चतुर्थी की कहानी:-
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Hartalika Teej 2020 Date

शिव-पार्वती  Hartalika Teej 2020 Date:- भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej 2020 Date) कीया ज...